. चाइल्ड पोज़ योग। .
क्यों चाइल्ड पोज़ इतनी
शांति देने वाली होती है?
हमने पिछले कुछ वर्षों में चाइल्ड पोज़ (बालासन) के बारे में कई मीम्स देखे हैं। यह मुद्रा इतनी लोकप्रिय क्यों हो गई है, खासकर तनावपूर्ण समय में? आइए जानते हैं।
चाइल्ड पोज़ का आकर्षण
एक योग स्टूडियो में, जहाँ हर क्लास की शुरुआत "चाइल्ड पोज़, कृपया" से होती थी, लोग खुद को जमीन पर छोड़ देते थे और तनाव से राहत महसूस करते थे। महामारी के दौरान, यह मुद्रा लोगों की पसंदीदा बन गई। सोशल मीडिया पर इस पोज़ से जुड़े कई मीम्स वायरल हुए, जैसे:
"पैंडेमिक योगा" मीम, जिसमें योगी सीधे बालासन में चला जाता है।
एक महिला किराने की दुकान के बीच में चाइल्ड पोज़ ले लेती है, और टेक्स्ट में लिखा होता है—"योग शिक्षक ने कहा था जब भी ज़रूरत हो, चाइल्ड पोज़ ले सकते हैं।"
इसका मतलब है कि तनावपूर्ण समय में लोगों को इस मुद्रा से राहत महसूस होती है।
चाइल्ड पोज़ से शांति
कैसे मिलती है?
डॉ. लॉरी रुबेनस्टीन फाज़ियो के अनुसार, यह मुद्रा शरीर के पीछे के हिस्से की मांसपेशियों और फैशिया को खींचती है, जो तनाव में कठोर हो जाते हैं। इससे शरीर "स्ट्रेस रिस्पॉन्स" से "रिलैक्सेशन रिस्पॉन्स" में आ जाता है।
इसके अलावा, जब माथा ज़मीन से छूता है, तो Oculocardiac Reflex (OCR) सक्रिय होता है, जो हृदय गति को धीमा कर देता है और शरीर को आराम महसूस कराता है।
विज्ञान और चाइल्ड पोज़
इस मुद्रा में वैगस नर्व सक्रिय होती है, जो तनाव प्रतिक्रिया को धीमा करती है।
यह GABA (Gamma-aminobutyric acid) नामक न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर को बढ़ाती है, जिससे चिंता कम होती है।
समय के साथ, यह कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) के स्तर को घटाने में मदद करता है।
यह मुद्रा हमें अंदरूनी शांति महसूस करने और खुद को समझने का अवसर देती है।
नाम में ही छुपा है अर्थ
बच्चों के योग में इसे "रॉक" या "सीड" कहा जाता है, क्योंकि यह हमें स्थिरता और नई शुरुआत का अनुभव कराता है।
योग विशेषज्ञ अलाना कैवल्या के अनुसार, "बालासन हमें यह याद दिलाता है कि हम बच्चों से बहुत कुछ सीख सकते हैं, क्योंकि वे पूरी तरह से वर्तमान में रहते हैं।"
चाइल्ड पोज़ के फायदे
लेखक मार्क नेपो लिखते हैं, "कठिन समय में, जो चीज़ हमारे बगल में थकी हुई है, वही हमारा परिवार है।"
महामारी ने हमें यह सिखाया कि आराम करना भी उत्पादकता का हिस्सा है।
योग शिक्षक ट्रिशा हर्सी कहती हैं, "आराम करना हमें मेहनत की संस्कृति से मुक्त करने का एक क्रांतिकारी तरीका देता है।"
कवि ऑड्रे लॉर्डे के अनुसार, "अपनी देखभाल करना आत्म-भोग नहीं, बल्कि आत्म-संरक्षण है।"
अगर यह मुद्रा आरामदायक
न लगे, तो क्या करें?
हर किसी का शरीर अलग होता है, इसलिए यह मुद्रा हर किसी के लिए समान नहीं होती। अगर आपको असुविधा हो रही है, तो इन परिवर्तनों को आज़माएँ:
1. माथा ज़मीन तक नहीं पहुँच रहा?
एक ब्लॉक, किताब, या हाथों पर माथा टिकाएँ।
2. घुटनों में दर्द हो रहा है?
घुटनों के नीचे एक मोड़ा हुआ कंबल रखें।
3. कूल्हे एड़ियों तक नहीं पहुँच रहे?
तकिया या ब्लैंकेट बीच में रखें ताकि आप
आराम से बैठ सकें।
4. श्वास में कठिनाई हो रही है?
यदि यह मुद्रा असहज लगे, तो इसे छोड़ दें और
दूसरी मुद्रा अपनाएँ।
अंत में...
अगर आप योग मैट से दूर भी हैं, तब भी इस मुद्रा की मानसिक छवि बना सकते हैं और इसका लाभ ले सकते हैं।तो जब भी ज़रूरत महसूस हो, रुकें, साँस लें, और आराम करें। और जब आप तैयार हों, तभी फिर से शुरू करें।







